जाणता राजा

27 फेब्रुवारी

शिवशाहीर बाबासाहेब पुरंदरे यांच्या “जाणता राजा” या महानाट्यातील औरंगझेबाचे हे स्वगत आहे..
दरबारात आल्यांनतर नेहेमीचे अल्काबाचे नारे बंद झाले कि त्याची शहजाद्याना उद्देशून सुनावणी सुरु होते..
ते पूर्ण स्वगत आपल्यासाठी साभार देतो आहे..

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ये सब फिजूल है शहजादे !! चंगेज और तैमुर के खून ने कभी शिकस्त नहीं देखी | लेकिन आज कंधार से तंजोर तक सारे हिन्दोस्तां को मुगलिया सल्तनत में शामिल करने का ख्वाब देखनेवाले माबदौलत , ये आज क्या देख रहे हैं ? हमारी आँखों के सामने सिवाजी अपनी सल्तनत की तामीर कर चुका है | हमारे लाखों के फौज के सुबहदारोंको शिकस्त देकर खदेड़ दिया है उसने !!

ये है हमारे मामूजान आमिर – उल – उमरा शायिस्तेखान साहब ! सबसे शर्मनाक बात तो ये है शहजादे की सिवाजी ने इनके लाल महल पर छापा मारकर इनके छक्के छुडा दिए | ये तो तक़दीर के सिकंदर थे की जान बच गयी , तीन उँगलियाँ ही खोनी पड़ी इन्हें |

ये है हमारे सिपहसालार जसवंतसिंह , जोधपुर महाराजा | मराठों के मार के जख्म इन्होने अपने सीने पे नहीं पीठ पे खाए है |

ये है सूरत के खुबसूरत सुबहदार इनायतखान बहाद्दुर | सिवाजी सूरत आये तो ये सूरत से दूम दबाके भाग गए |

ये है हबशी फौलादखान | इनके हथेली पर मिठाई रखकर सिवाजी आगरा के कैद से भाग निकला| हमारे सारे मनसुबोंको खाक में मिला दिया इस फौलादखान ने |

ये कारतलबखान ,ये रसूल बेग रोझबानी ,ये मीर – ए -आतिश तरबियतखान ,ये खान जहाँबहाद्दुर बहादुरखान कोकल्ताश ,ये बूंदीनरेस भावसिंह हाडा ,ये रनमस्तखान , ये केसरसिंह ,ये सय्यद मुनव्वरखान …बारहा ….. तमाम सारे रजपूत , बुन्देल ,तुर्क , इराणी , अफगानी , उझबेकी , हबशी , मुग़ल फौजमंद सरदार जिन्हें सिवाजी नें शिकस्त दी | सारी इज्जत मिटटी में मिला दी | क्यों ? क्यों सिवा को ये फतह हासिल होती है ? हमारे तरह गोला , बारूद ,हाथी ,घोडे , खजाना , तोफे ,सिवा के पास नहीं है | फिर भी फतह हासिल होती है उसे | क्यों ?

ये क्यों का मतलब तुम कभी नहीं समझ पाओगे शहजादे ,तुम कभी समझ नहीं पाओगे | औरत ,शराब ,नाचगाने ,मौजमस्ती ,इश्क और मोहब्बत में गिरफ्तार तुम जैसे , बहादुर सिवा को कभी समझ नहीं पाओगे |

इस सिवाने मजबूत किले बनाये ,अपनी फौज और असला बढाया , नए जंग – ए – बेहेरिन की तामीर की है उसने | लेकिन उससे भी कई ज्यादा न जीते जानेवाले मजबूत जमीर के लोग तैय्यार किये है उसने | हमने सिवा लोगोंको लाखोंकी की जागीर का लालच दिया लेकिन उन जाँबाज मराठोने उसपर थूंक दिया | आजतक हम दुनिया की हर चीज खरीद सकते थे लेकिन सिवा के उन खुद्दार खादिमों ने खुद को बिकने नहीं दिया | वे रुकते नहीं , वे थकते नहीं , वे झुकते नहीं और वे बिकते भी नहीं | सिवाजी घाग है , चालाक हैं , दगाबाज हैं, नामक्कुल हैं ,मग्रूर हैं ,बदकार हैं ….लेकिन उसका चालचलन दूध की तरह साफ और सूरज की तरह चमकदार हैं | दुश्मन के भी मजहब ,मजहबी कलम , औरत और फकीरों की इज्जत करता हैं वो | इसीलिए उसकी इज्जत और शौहरत बुलंद मिनार की तरह सर उठाये आसमाँ को छु रही है | इसमें कोई शक नहीं शहजादे की हम खुशनसीब है ,, हमें दुश्मन भी जो मिला वो सिवाजी जैसा !!!!!!!!

2 प्रतिसाद to “जाणता राजा”

  1. Chetan Paithane at 9:44 pm #

    Very good Dnyaneshwar !!! Keep it up !!!

  2. manoneet at 12:40 सकाळी #

    धन्यवाद चेतन..!!

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